रामचंद्र मिशन आश्रम में शांति, श्रद्धा और साधना का संगम

अभिषेक चौहान ब्यूरो शाहजहांपुर

बाबूजी महाराज जयंती समारोह के दूसरे चरण का शुभारंभ

देश विदेश के हजारों अभ्यासियों ने किया गुरुसत्ता को प्रणाम

 

शाहजहांपुर। श्री राम चन्द्र मिशन के अध्यक्ष एवं हार्टफुलनेस मेडीटेशन के वैश्विक मार्गदर्शक कमलेश डी. पटेल ‘दाजी’ के सान्निध्य और मार्गदर्शन में राम चन्द्र मिशन आश्रम में आयोजित बाबूजी महाराज जयंती समारोह के दूसरे चरण का आज सुबह ध्यान साधना के साथ इस आध्यात्मिक उत्सव का शुभारंभ हुआ। देश विदेश के हजारों अभ्यासियों ध्यान साधना कर मानवता के कल्याण और विश्व शांति के लिए प्रार्थना की। ध्यान आरंभ होने से पूर्व प्रकृति ने अपने प्रचंड रूप में तेज आंधी और मूसलाधार वर्षा का आवरण ओढ़ लिया,किंतु यह प्राकृतिक बाधा भी साधकों की आंतरिक साधना को विचलित न कर सकी। वर्षा की तीव्र धाराओं के मध्य, जब आकाश गर्जन कर रहा था और धरती जल से सराबोर थी, तब भी हजारों अभ्यासियों ने अडिग संकल्प के साथ ध्यान साधना जारी रखी। मौसम की विपरीत परिस्थितियों में भी पूज्य दाजी ने स्वयं वर्षा के मध्य उपस्थित होकर साधकों का मार्गदर्शन किया और उन्हें ध्यान कराया। वह क्षण केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, समर्पण और आध्यात्मिक दृढ़ता का दिव्य उत्सव बन गया—जहां प्रकृति का कोलाहल, अंतर्मन की शांति के समक्ष नतमस्तक हो उठा, मानो प्रकृति स्वयं इस आध्यात्मिक अनुष्ठान की साक्षी बन गई हो।

इस मौके पर दाजी ने अपने संदेश में कहा कि जब तक हम अपने हृदय में अपने गुरुओं के प्रति श्रद्धा नहीं पैदा करेंगे तब तक हमारी आध्यात्मिक उन्नति संभव नहीं है। श्रद्धा कोई ऐसा भाव नहींं हैै जिसेे प्रयास सेे उत्पन्न किया जा सके। श्रद्धा आत्मा की स्मृृति हैै। हमारेे भीतर का कुुछ हिस्सा पहलेे सेे ही घर

की दिशा जानता हैै। जो तड़प हम ध्यान के दौरान महसूूस करतेे हैंं,ध्यान केे बाद की शांंति मेंं महसूूस होती हैै जब जीवन बाहर सेे पूूर्ण लगता हैै, वास्तव मेंं

वह आत्मा की अपनेे मूूल घर की याद हैै। यह श्रद्धा का प्रारंंभिक रूप हैै जो अभी

पूूर्ण रुप से विकसित नहींं हुुई हैै लेेकिन स्पष्ट रूप सेे जीवित हैै।

भगवद्‌‌गीता में श्री कृष्ण कहते हैं कि “मनुुष्य जिसके प्रति श्रद्धा रखता हैै, वही बन जाता हैै। दाजी ने कहा कि मैंं चााहता हूं कि आप यह जाने कि आपका हृदय कहाँँ स्थिति हैै, आपका अंंतर्ममन किस पर भरोसा करता हैै। हृदय जिस पर सबसेे गहन भरोसा

करता हैै, वह न केेवल जीवन की दिशा तय करता हैै, बल्कि आत्मा केे स्वरूप को भी

गढ़ता हैै।

सायंकालीन ध्यान सत्र में भी पूज्य दाजी ने साधकों को ध्यान कराया। इस मौके बाबूजी महाराज के जीवन पर आधारित वृत्तचित्र का प्रदर्शन किया गया। आयोजन को सफल बनाने में मिशन के संयुक्त सचिव अर्जुन अग्रवाल, उत्तर प्रदेश प्रभारी अनुपम अग्रवाल, माधो गोपाल अग्रवाल, ए.के. गर्ग, आश्रम प्रबंधक प्रमोद कुमार सिंह, श्रीगोपाल अग्रवाल, सुयश सिन्हा, ममता सिंह, राज गोपाल अग्रवाल,डॉ.अनुराधा अग्रवाल, सुरेंद्र सिन्हा,श्वेता, शालिनी श्रीवास्तव, रीना,मधु भानु,सौरभ,नेहा आदि का विशेष सहयोग रहा।

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