आत्मा परमात्मा का मिलन ही तो रास है

मोहित गुप्ता स्टेट हेड

 

कस्बे के मोहल्ला दिलेरगंज स्थित माँ कात्यायनी शक्तिपीठ पर सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा में पधारे आचार्य जितेंन्द्र कृष्ण व्यास जी के श्री मुख से कथा के छठे दिन यह महारास की रात्रि ब्रह्म और जीव के मिलन की रात्रि है इस रात्रि में ब्रह्म और जीव का साक्षात्कार हुआ साथ ही कामदेव और भगवान कृष्ण का युद्ध भी हुआ इस युद्ध में कामदेव पराजित हुआ और इस युद्ध के फल स्वरुप कामदेव को भगवान कृष्ण के पुत्र के रूप में जन्म लेना पड़ा जैसा कि सभी को पता है भगवान शंकर ने कामदेव को भस्म किया था कामदेव के भस्म होने के पश्चात कामदेव की पत्नी रति ने भगवान शंकर से बड़ी अरुनय विनय करी तो भगवान शंकर ने कहा चिंता ना करो जब यदुवंश कृष्ण अवतारा अर्थात् जब भगवान कृष्ण का अवतार होगा उस समय भगवान कृष्ण के पुत्र के रूप में तुम्हारा पति अवतरित होगा तो महारास की कथा में हमें यही भाव मिलता है आत्मा परमात्मा का मिलन ही तो रास है यही महारास है महाराज जी ने कथा के माध्यम से बताया कि कंस वध अभिमान का सर्वनाश करने के लिए भले ही भगवान ही क्यों ना हो लेकिन उन्हें वृंदावन में 11 वर्ष 55 दिन तक रहकर के साधना करनी पड़ती है यह भगवान के साधना काल का समय है कंस वध के पश्चात जरासंध का आगमन होता है जरा माने बुढ़ापा भागवत के दशम स्कंध के 50 वें अध्याय में जरासंध आता है अर्थात जीवन में जब 50 वर्ष शुरू हो जाता है तो हमारे जीवन में बुढ़ापा आता है तो हमें क्या करना चाहिए हमें बुढ़ापे के अनुसार अपने जीवन की दिशा को बदल लेना चाहिए भगवान ने अपने जीवन में अनेक अनेक शत्रुओं का दुष्टों का संघार किया महाभारत जैसा युद्ध कराया और इस कथा का असली सार गोपी विरह है क्योंकि प्रेम के बिना गोपियों की कल्पना करना गोपियों के बिना कृष्ण की कल्पना करना और कृष्ण के बिना राधा की कल्पना करना यह संभव नहीं है और कहते हैं कि भगवान कृष्ण वृंदावन को छोड़कर के गए वह कहीं नहीं गए भागवत जी में कहा है *वृंदावनं परित्यज्य पदमेकम् न गच्छति* भगवान ने अपने इस 11 वर्ष 55 दिन के कार्यकाल में दो महानुभावों को चतुर्भुज स्वरूप के दर्शन दिए पहले श्री गर्ग जी महाराज दूसरे श्री अक्रूर महाराज अक्रूर जी मथुरा से आते हैं भगवान कृष्ण को ले जाते हैं पूरा वृंदावन बिरह में द्रवित हो जाता है श्री राधा रानी को 100 साल का जो साप था वह प्रारंभ हो जाता है इस श्रृंखला में उद्धव जी आते हैं उद्धव जी के ज्ञान की गठरी पर प्रेम का पुट लगता है तो उद्धव का ज्ञान भी धन्य हो जाता है और कहते हैं खुसरो दरिया प्रेम का उल्टी वा की धार जो तेरा शो डूब गया जो डूबा वो पार इसलिए उद्धव जैसे ज्ञानी उधर जैसे परम ज्ञानी बृहस्पति के शिष्य को भी जो गोपिया कहीं गुरुकुल नहीं गई कहीं पढ़ने नहीं गई उनका शिष्य बनना पड़ा तो भक्ति हमारे यहां सर्वोपरि है क्योंकि भक्ति मां है उद्धव जी जब भगवान के पास जाते हैं तो खींझ करके कहते हैं तुम्हारी आवश्यकता इन पैसे वाले लोगों के बीच में नहीं है तुम्हारी आवश्यकता उन फकीरों के बीच में है उन संतों के बीच में है नंद और यशोदा के बीच में यह गोपी विरह का अर्थ नहीं है इसी श्रृंखला में कथा के मध्य रुक्मणी विवाह की चर्चा हुई सभी भक्तों ने भगवान के इस विवाह उत्सव का पूर्ण आनंद लिया सभी भक्तों ने खूब नृत्य किया सभी झूम कर खूब आनंद लिया // इस प्रसंग के अवसर पर कथा के संकल्पी मुख्य यजमान श्रीमती शारदा सिंह ने व्यास पीठ पर आसीन व्यास भगवान का पूजन किया कन्यादान संकल्प हुआ तुलसी शालिगराम विवाह संपन्न हुआ संगीत टोली में चित्रकूट धाम से पधारे रमाकान्त तिवारी ,किसन मिश्रा

अंकुश बाजपेयी

आचार्य मंडल में आशीष तिवारी दीपक शुक्ला कुलदीप शुक्ला शांतनु अग्निहोत्री विकास तिवारी सुधांशु पांडेय ऋषभ दीक्षित विपिन त्रिवेदी आदित्य पांडेय शिखर मिश्रा की उपस्थिति रही

माँ कात्यायनी शक्तिपीठ के पीठाधीश्वर स्वामी आत्मानंद गिरी महाराज ने बताया की कथा में सभी भक्तों को बड़ा ही आनन्द आरहा है सभी भक्त जन प्रतिदिन कथा के पश्चात भंडारा प्रसाद पाकर अपने अपने घरों को प्रस्थान करते हैं

इस अवसर पर शैलेंद्र मिश्रा शिवनायक मिश्रा अरुण कुमार श्रीवास्तव सुभाष रस्तोगी गौरव श्रीवास्तव पियूष गुप्ता मधु कश्यप दुर्गावती शुक्ला प्रथा मिश्रा आदि भक्त सपरिवार उपस्थित रहे।

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