सफलता के लिए ज्ञान और कौशल आवश्यक: डॉ भूपेन्द्र सिंह

अभिषेक चौहान ब्यूरो शाहजहांपुर

शाहजहाँपुर, एस० एस० कॉलेज के वाणिज्य विभाग और बरेली कॉलेज बरेली के वाणिज्य विभाग के संयुक्त तत्वाधान में एस एस कॉलेज में एक राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया जिसका विषय था, ” वर्तमान भौतिकवादी युग में तनाव प्रबंधन”। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए बरेली कॉलेज, बरेली के वाणिज्य विभागाध्यक्ष प्रो० भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि जीवन में सफलता के लिए ज्ञान और व्यावहारिक कौशल की आवश्यकता होती है।इसलिए छात्र-छात्राओं को परीक्षा में प्राप्तांकों को लेकर तनाव ग्रस्त नहीं होना चाहिए। मुख्य अतिथि वाणिज्य संकाय के अधिष्ठाता प्रो० अनूप अग्रवाल ने कहा कि धन के पीछे भागना तनाव को आमंत्रित करना है। उन्होंने कहा कि अमीर लोग गरीबों की अपेक्षा अधिक तनाव ग्रस्त होते है। वह अपने तनाव को कम करने के लिए भारी शुल्क चुकाकर मनोवैज्ञानिकों से परामर्श लेते है। मुख्य वक्ता बरेली कॉलेज के प्रो० ओमकार ने कहा कि स्वस्थ्य और प्रसन्न रहने के लिए तनाव प्रबंधन आवश्यक है। उन्होंने कहा की विद्यार्थियों को यह ध्यान रखना चाहिए कि धनार्जन से अस्थायी सुख मिल सकता है किन्तु स्थायी शांति नहीं। इससे पूर्व डॉ अनुराग ने विषय स्थापना करते हुए कहा कि जीवन में उतने ही भौतिक साधनों का संग्रह करना चाहिए जितने आवश्यक हों। वर्तमान समय में यद्यपि भौतिक साधनों के महत्त्व से इंकार नहीं किया जा सकता किन्तु यह ध्यान रखना चाहिए कि जीवन भौतिक साधनों के अर्जन और संग्रह के लिए नहीं है अपितु जीवन के लिए भौतिक साधन होते हैं। सेमीनार में चार तकनीकि सत्र भी आयोजित किये गए जिनके अंतर्गत छात्र-छात्राओं तथा शोधार्थियों द्वारा 52 शोध पत्र पढ़े गए। इस अवसर पर 44 शोध पत्रों से सुसज्जित एक पुस्तक का विमोचन भी किया जिसका शीर्षक था, “भौतिकवादी युग में तनाव प्रबंधन : कारण, प्रभाव एवं समाधान” । पुस्तक का संपादन वाणिज्य विभाग के प्रो० कमलेश गौतम और श्रीमती अपर्णा त्रिपाठी ने किया है । 343 पृष्ठों की इस पुस्तक में, तनाव प्रबंधन में शिक्षकों की भूमिका, आधुनिक एवं परंपरागत व्यापार मॉडल्स के माध्यम से तनाव प्रबंधन, शैक्षिक तनाव, रोजगार क्षेत्र का तनाव, कार्य-जीवन का तनाव, मानसिक एवं शारीरिक तनाव, तनाव प्रबंधन का मनोविज्ञान तथा नेतृत्व में तनाव प्रबंधन जैसे ज्वलंत विषयों पर शोध पत्र सम्मिलित किए गए हैं।

पुस्तक के सम्पादक एवं कार्यक्रम संचालक प्रो० कमलेश गौतम ने कहा कि यह पुस्तक तनाव के सामाजिक, मनोवैज्ञानिक एवं व्यवहारिक कारणों को स्पष्ट करने के साथ उनके प्रभावों और निवारण के लिए व्यावहारिक उपाय भी सुझाती है। विशिष्ट अतिथि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की राष्ट्रीय कार्यकारणी के सदस्य मचकेंद्र सिंह ने कहा कि यह पुस्तक विद्यार्थियों के अतिरिक्त जन सामान्य के लिए भी उपयोगी होगी। भविष्य में विद्यार्थियों की समस्याओं, उनके अपराधीकरण, अवसाद, और आत्महत्या जैसे कृत्यों का अवलोकन करके उनके समाधान पर पुस्तक प्रकाशित की जानी चाहिए। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ स्वामी शुकदेवानंद सरस्वती जी के चित्र पर पुष्पांजलि से हुआ। डॉ गौरव सक्सेना और डॉ अजय वर्मा ने अंग वस्त्र उढ़ाकर अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर डॉ० देवेंद्र सिंह, डॉ० विजय तिवारी , डॉ बरखा सक्सेना, अखंड प्रताप सिंह, व्याख्या सक्सेना, बृज लाली, अपर्णा त्रिपाठी, पोथी राम सिंह सहित अनेक शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित थे। अंत में डॉ गौरव सक्सेन ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।

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