रामचरण लाल धर्मशाला में आयोजित हरिकथा का तीसरा दिवस

अभिषेक चौहान ब्यूरो शाहजहांपुर

 

वास्तविक भक्ति और सुख शांति बिना गुरु संभव नहीं:- साध्वी सुरजीता भारती

 

शाहजहांपुर। दिव्य ज्योति जाग्रती संस्थान द्वारा खिरनी बाग, रामचरण लाल धर्मशाला में तीन दिवसीय श्री हरि कथा का आयोजन किया जा रहा है तृतीय दिवस के प्रसंग में श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी सुरजीता भारती जी ने बताया कि अगर एक मनुष्य अपने जीवन में वास्तविक भक्ति और ईश्वर और सुख शांति को प्राप्त करना चाहता है तो वह उसे बिना गुरु के प्राप्त नहीं हो सकता क्योंकि भक्ति से ही मनुष्य की जीवन में सुख प्राप्त होता है हमारे शास्त्रों में कहा भक्ति क्या होती है भक्ति भक्ति का अर्थ होता है जुड़ना ईश्वर से जुड़ना परमात्मा से मिलना परमात्मा को देखना और ईश्वर को दिखाने का कार्य कौन करता है पूर्ण गुरु बिना गुरु के वह उसे वास्तविक भक्ति को प्राप्त नहीं कर सकता ना भक्ति का आनंद और ना ही परमात्मा को प्राप्त कर सकता है

 

ऐसी स्थिति में एक मनुष्य को पूर्ण गुरु की पहचान नहीं होगी तो वह निश्चित ही झूठे पाखंडी गुरुओं के द्वारा ठगा जाएगा और अपने मानव जीवन को व्यर्थ कर देगा इसलिए जब गुरु की बात आती है तो हमारे शास्त्र ग्रंथ गुरु की पहचान भी देते हैं जिस प्रकार से असली नोट होता है तो असल की आड़ में नकली नोट भी चल जाता है और जिन्हें असली नोट की पहचान नहीं होगी वो ठगे भी जाते हैं इसलिए सरकार के द्वारा असली नोट की कुछ पहचान बताई जाती और जब एक व्यक्ति उस पहचान को लेकर नोट को परखता है तो वह कभी धोखा नहीं खाता ठीक इसी प्रकार से समाज के भीतर झूठे पाखंडी संत भी हैं तो इन संतों के बीच हम सच्चे गुरु को कैसे खोजे ,तो यह पहचान भी हमारे शास्त्र ग्रंथ हमें देते हैं शास्त्रों में कहा

* *अखण्ड मंडलाकारम व्याप्तं येन चराचरं , तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्री गुरुवे नमः**

अर्थात वह परमात्मा जो अखंड है सभी जगह व्याप्त है ऐसे परमात्मा का दर्शन जो गुरु करवाते हैं ऐसे गुरु को बारंबार प्रणाम है भाव गुरु परमात्मा से मिलवाने का कार्य करते हैं ईश्वर को दिखाने का कार्य करते हैं जो परमात्मा इंसान के भीतर ही छिपा बैठा है इस रहस्य को गुरु ही एक मनुष्य के सामने प्रकट करते हैं अर्थात इंसान के संपूर्ण दुखो का नाश करने वाले वह परमात्मा एक मनुष्य के भीतर ही हैं लेकिन जब संत जीवन में आते हैं तो उसे ईश्वर को प्रकट कर वह मनुष्य के सभी दुखों को हरण करने की युक्ति एक मानव को दे देते हैं और इस प्रकार से एक मनुष्य अपने जीवन में ईश्वर की वास्तविक भक्ति को कर पता है इसलिए हमें भी अपने इस जीवन को सार्थक करने की आवश्यकता है और ऐसे गुरु को प्राप्त करने की आवश्यकता है जो उसे परमात्मा से मिलवा दे जो केवल ईश्वर की चर्चा ना करें केवल ईश्वर की बातें ना सुनाएं वरन परमात्मा को ईश्वर को दिखाने की भी समर्थ रखें।

ईश्वर मात्र कहने और सुनने का विषय नहीं है ईश्वर देखने और दिखाने का विषय है और जब एक मनुष्य उसे परमात्मा को देख लेता है तो यह संसार रूपी बारात इस फीकी लगने लगती है इसलिए भक्तों हम भी इस जीवन को सार्थक करें और ऐसी गुरु की तलाश करें जो हमारी दिव्य दृष्टि को खोलकर हमारे अंदर ही उसे परमात्मा को दिखा दे , वह दिव्य दृष्टि जहां मनुष्य बिंदी तिलक सजाता है वही स्थित होती ओर पूर्ण गुरु द्वारा खोली जाती है जब वह खुलती है उसी से अंदर परमात्मा का दर्शन होता है जब एक इंसान उस परमात्मा को देख के भक्ति करता हैं तो इसी में मानव जीवन की सार्थकता होती और उसका कल्याण है कल्याण भी होता है

आज की कथा का शुभारंभ आरती पूजन करके नीरज बाजपेई विनोद गुप्ता सुबोध शर्मा मोहन ग्रोवर शोभना गुप्ता राजमाता वीरेश्वरी शर्मा ने कराया।

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