केंद्रीय बजट 2026 शिक्षा के लिए परिवर्तनकारी, भारत को Industry 4.0 की ओर ले जाएगा: शिक्षाविद मनोज वशिष्ठ

राजेश भारद्वाज स्टेट हेड हरियाणा

 

रेवाड़ी। शिक्षाविद मनोज वशिष्ठ ने 1 फरवरी 2026 को प्रस्तुत केंद्रीय बजट को शिक्षा क्षेत्र के लिए “परिवर्तनकारी और भविष्योन्मुखी” बताते हुए कहा कि यह बजट भारतीय शिक्षा प्रणाली को पारंपरिक ढांचे से निकालकर आधुनिक तकनीकी युग में प्रवेश कराने वाला है।

मनोज वशिष्ठ के अनुसार, शिक्षा के डिजिटलीकरण और स्कूलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) लैब्स की स्थापना के लिए किया गया प्रावधान आने वाले वर्षों में मील का पत्थर साबित होगा। इससे छात्रों को प्रारंभिक स्तर से ही भविष्य की तकनीकों से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त होगा।

उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और मेधावी छात्रों के लिए बनाई गई योजनाएँ शिक्षा में व्याप्त असमानता को कम करने की दिशा में बड़ा कदम हैं।

‘सिंगल विंडो पोर्टल’ के माध्यम से DBT द्वारा राशि सीधे छात्रों के खातों में पहुँचने से भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगेगा।

शोध और उच्च शिक्षा पर बोलते हुए वशिष्ठ ने बताया कि नेशनल रिसर्च फाउंडेशन के तहत पीएचडी एवं शोध फेलोशिप में बढ़ोतरी प्रतिभा पलायन (Brain Drain) रोकने में सहायक होगी और इसे “ब्रेन गेन” में बदला जा सकेगा।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि नए IIT-IIM की घोषणा के बजाय मौजूदा संस्थानों में सीटों की संख्या बढ़ाने और इंफ्रास्ट्रक्चर के आधुनिकीकरण पर दिया गया जोर “गुणवत्ता बनाए रखने की व्यावहारिक रणनीति” है।

बजट में प्रस्तावित 3 नए ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर AI’ को उन्होंने भारत को चौथी औद्योगिक क्रांति (Industry 4.0) के लिए तैयार करने वाला कदम बताया।

ग्रामीण शिक्षा पर टिप्पणी करते हुए मनोज वशिष्ठ ने कहा कि मॉडल स्कूलों और PM-SHRI स्कूलों के विस्तार के लिए अतिरिक्त फंड “ग्रामीण भारत में शिक्षा के स्तर को सुधारने की कुंजी” है और इसे उन्होंने “सामाजिक न्याय का शैक्षिक संस्करण” करार दिया।

अंत में उन्होंने कहा—

“यह बजट शिक्षा की जर्जर नौका को छोड़कर आधुनिकता के महासागर में उतरने वाला एक स्वर्ण-पोत है, जिसमें सुदूर ग्रामीण अंचल के अंतिम छात्र से लेकर महानगरों की मेधा तक—सबके लिए संभावनाओं का आकाश और वैश्विक क्षितिज मौजूद है।

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