प्रशासन बेखबर, बावल क्षेत्र के गांवों में गहराया बिजली-पानी का संकट

राजेश भारद्वाज स्टेट हेड हरियाणा

 

40 घंटे बाद भी अधिकांश गांवों में बिजली गुल , ग्रामीण महंगे दामों पर पानी खरीदने को मजबूर

 

भीषण गर्मी में बिना बिजली पानी के जीना हुआ मुहाल

 

धीमी गति से चल रहा है बिजली सुचारू करने का कार्य –

 

रेवाड़ी। मंगलवार को आई तेज आंधी और बारिश ने बावल क्षेत्र में भारी तबाही मचाई है। आंधी को गुजरे करीब 40 घंटे से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन बावल क्षेत्र के अधिकांश गांवों में अब भी बिजली आपूर्ति पूरी तरह बहाल नहीं हो सकी है। बिजली गुल रहने के कारण अब ग्रामीण इलाकों में पेयजल संकट भी गहरा गया है। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीणों को मजबूरी में 800 रुपये तक खर्च कर पानी के टैंकर मंगवाने पड़ रहे हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली विभाग द्वारा 12 घंटे के भीतर आपूर्ति सुचारू करने के दावे किए गए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत दिखाई दे रही है। कई गांवों में लोग अंधेरे में रातें बिताने को मजबूर हैं, जबकि पानी की किल्लत ने उनकी परेशानी को और बढ़ा दिया है।

*300 से अधिक बिजली के खंभे और दर्जनों ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त*

जानकारी के अनुसार तेज आंधी के कारण बावल क्षेत्र में बिजली व्यवस्था को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार क्षेत्र में करीब 300 से अधिक बिजली के खंभे टूट गए हैं, जबकि तीन दर्जन से अधिक ट्रांसफार्मर भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। कई स्थानों पर हाईटेंशन और लो-टेंशन लाइनें धराशायी हो गईं, जिससे पूरे इलाके की विद्युत व्यवस्था चरमरा गई।

बिजली विभाग के कर्मचारी और अधिकारी लगातार मरम्मत कार्य में जुटे हुए हैं, लेकिन नुकसान इतना बड़ा है कि आपूर्ति सामान्य करने में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है।

*पानी के लिए भटक रहे ग्रामीण*

बिजली आपूर्ति बाधित होने का सबसे बड़ा असर पेयजल व्यवस्था पर पड़ा है। अधिकांश गांवों में ट्यूबवेल और जलघर बिजली से संचालित होते हैं। बिजली नहीं होने के कारण जलापूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है।

गांवों के लोगों का कहना है कि घरों में रखा पानी खत्म हो चुका है और अब उन्हें निजी टैंकरों के सहारे गुजारा करना पड़ रहा है। एक पानी का टैंकर 700 से 800 रुपये तक में मिल रहा है, जिससे आम ग्रामीणों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।

महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई गांवों में लोग दूर-दराज के हैंडपंपों और निजी बोरवेलों से पानी भरकर ला रहे हैं।

*सैकड़ों पेड़ उखड़े, सड़कें भी हुई बाधित*

आंधी का असर केवल बिजली व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा। क्षेत्र में सैकड़ों पेड़ उखड़ गए, जिनमें कई पुराने और बड़े पेड़ भी शामिल हैं। अनेक ग्रामीण सड़कों पर पेड़ गिरने से यातायात प्रभावित हुआ। कई स्थानों पर घंटों तक रास्ते बंद रहे, जिन्हें बाद में प्रशासन और स्थानीय लोगों के सहयोग से खुलवाया गया। किसानों को भी नुकसान झेलना पड़ा है। खेतों में खड़ी फसलों तथा बागवानी फसलों को आंधी और बारिश से नुकसान पहुंचा है।

*विभाग के दावे और जमीनी हकीकत में अंतर*

आंधी के तुरंत बाद बिजली विभाग द्वारा दावा किया गया था कि 12 घंटे के भीतर अधिकांश क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी। हालांकि 40 घंटे बाद भी बड़ी संख्या में गांव अंधेरे में डूबे हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विभागीय अधिकारियों के आश्वासन लगातार मिल रहे हैं, लेकिन बिजली कब आएगी, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित गांवों में तत्काल पेयजल टैंकर भेजे जाएं तथा युद्धस्तर पर बिजली बहाली का कार्य कराया जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके।

जनजीवन पूरी तरह प्रभावित

बिजली नहीं होने से घरों में इनवर्टर और बैटरियां जवाब दे चुकी हैं। मोबाइल फोन चार्ज करने से लेकर पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था तक बड़ी चुनौती बन गई है। गर्मी और उमस के बीच ग्रामीणों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।

बावल क्षेत्र के लोगों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा पर किसी का नियंत्रण नहीं होता, लेकिन आपदा के बाद राहत और पुनर्बहाली कार्यों की गति निश्चित रूप से तेज होनी चाहिए। फिलहाल क्षेत्र के हजारों लोग बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं की बहाली का इंतजार कर रहे हैं।

बावल के उपमंडल अधिकारी(ना.) संजीव कुमार का कहना है कि बिजली आपूर्ति बहाल करने का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है।

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