श्री भीमसेन मंदिर के पावन धाम में श्री मद् भागवत कथा के द्वितीय दिवस में राजा परीक्षित जन्म एवं सती चरित्य के विषय में बताया।

मृदुल कुमार कुलश्रेष्ठ सिटी रिपोर्टर मैनपुरी

फोटो परिचय – श्री मद् भागवत कथा का रसपान कराते कथा ब्यास आचार्य डॉ पंकज मिश्रा।

 

मैनपुरी। शहर के मोहल्ला गाड़ीवान स्थित श्री भीमसेन मंदिर के पावन धाम में शुरू हुई श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान सप्ताह के द्वितीय दिन रविवार की कथा में सर्वप्रथम कथा यजमान डॉ जितेंद्र सक्सेना एवं श्रीमती नीरजा सक्सेना, पुत्री दिव्या सक्सेना एवं अमन सक्सेना, पुत्र सिद्धार्थ सक्सेना ने प्रख्यात कथा व्यास आचार्य डॉ पंकज मिश्रा का तिलक लगाकर कर एवं मल्यार्पण कर ब्यास गद्दी का पूजन किया तत्पश्चात कथा व्यास आचार्य डॉ पंकज मिश्रा ने श्री मद् भागवत के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए सभी बताया कि श्री मद् भागवत में 12 स्कन्द , 335 अध्याय एवं 18000 श्लोक है। कथा व्यास आचार्य डॉ पंकज मिश्रा ने सती चरित्य के विषय में बोलते हुए कहा कि हिन्दू पौराणिक कथाओं में देवी सती की कहानी है, जो दक्ष प्रजापति की पुत्री और भगवान शिव की पहली पत्नी थीं; अपने पिता द्वारा पति शिव के अपमान से आहत होकर उन्होंने आत्मदाह कर लिया था, जिससे उनका शरीर 51 शक्तिपीठों में बिखर गया और उन्होंने अगले जन्म में पार्वती के रूप में जन्म लिया, जो शिव की अर्धांगिनी बनीं, और यह कथा प्रेम, आत्म-सम्मान व शक्ति का प्रतीक है। सती, दक्ष प्रजापति की पुत्री थीं, जिन्होंने अपनी इच्छा से शिव से विवाह किया, जबकि दक्ष को शिव पसंद नहीं थे।

दक्ष का यज्ञ: दक्ष ने एक विशाल यज्ञ किया और सभी देवी-देवताओं को आमंत्रित किया, लेकिन शिव को अपमानित करने के लिए उन्हें आमंत्रित नहीं किया।

सती का आत्मदाह: पिता के घर जाकर सती ने अपने पति शिव का अपमान सहा, जिसके कारण उन्होंने यज्ञ कुंड में कूदकर अपने प्राण त्याग दिए (आत्मदाह)।

शिव का क्रोध: सती की मृत्यु से क्रोधित होकर शिव ने वीरभद्र को भेजकर दक्ष का सिर धड़ से अलग करवा दिया।

शक्तिपीठों का निर्माण: शिव ने सती के शव को कंधे पर उठाकर तांडव किया, तब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से उनके शरीर के 51 टुकड़े किए, जो भारत में 51 शक्तिपीठ कहलाते हैं।

कथा व्यास आचार्य डॉ पंकज मिश्रा द्वारा भागवत भगवान की आरती की पूजा, अर्चना के उपरांत आरती की गई।

द्वितीय दिवस की पावन कथा में आयोजक सिद्धार्थ सक्सेना एवं युग, कास्वी, दिव्या सक्सेना,अमन सक्सेना, साक्षी, पियूष भटनागर,अंजना सक्सेना, राजेश सक्सेना, दीपाली, दिव्या सक्सेना, डॉ सूर्यमोहन सक्सेना, अल्का,निशा, निहारिका,मधु चौहान,निधि सक्सेना, दीपा,गोरी, सुरभि,विकास सक्सेना, मोहित, स्मृति,सोनेश,सुशील,गौरव,सुनील,अरुण, सोनेश, क्रांति,राजेंद्र बाबू, दीपक, मोहित,गौरव मुवार,पायल,ईशान,गौरव,सचिन, आकाश तिवारी,मृदुल कुलश्रेष्ठ, नेहा शुक्ला,पूजा, सचिन, कुलदीप आदि के अलावा बड़ी संख्या में महिलाएं पुरुष मौजूद रहे।

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