लखीमपुर खीरी में राष्ट्रकवि भोलानाथ शेखर की 113वीं जयंती मनाई गई

महेंद्र गुप्ता ब्यूरो लखीमपुर खीरी

 

लखीमपुर खीरी में स्थित उनके निज निवास मोहल्ला नई बस्ती में राष्ट्रकवि भोलानाथ शेखर की 113वीं जयंती के अवसर पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए। इस अवसर पर परिवार के सभी सदस्यों ने उनकी पुस्तक “तलवार चली” से कविता पाठ किया।

 

*परिवार की प्रस्तुतियां*

 

– उनके बड़े पुत्र रामगोपाल ने शेखर जी की कविता “भारतीय नारी” से कुछ पंक्तियां प्रस्तुत कीं: “तुम हो सहाय असहयों की, तुम दिनों की दुख हरनी हो, हो तुम ही जन्मदाता जग की, तुम जग की पालन करनी हो।”

– परपोत्र नाभ्य शेखर ने कविता के कुछ अंश प्रस्तुत किए: “खप्पर त्रिशूल वाली बनकर, चंडिका मुंड माली बनाकर तुम कूद पड़ो सीमाओं पर, काली बन कंकाली बनकर।”

– परपोती रिद्धिमा शेखर ने होली पर रचित कविता के कुछ अंश प्रस्तुत किए: “त्याग अभियान मान अपमान, शत्रु कर रहा शत्रु से प्यार, अजब है होली का त्यौहार।”

– पोत्र एडवोकेट रजत शेखर ने कविता और कवि शीर्षक से कविता पाठ किया: “कविता कवि का दम भरती है, वीणावादिनी द्वार कवि का, निशि वॉशर झांका करती है।”

 

*कवि की शहादत*

 

कविवर भोलानाथ शेखर की मृत्यु 60 वर्ष पूर्व करवा चौथ के दिन हुई थी, जब वे एक अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में काव्य पाठ कर रहे थे। उनकी शहादत को आज भी याद किया जाता है और लखीमपुर खीरी नगर पालिका परिषद द्वारा आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन कविवर भोलेनाथ जी शेखर जी की स्मृति में ही होता चला आ रहा है।

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