संजोली पाण्डेय के सुरमई प्रस्तुतियों ने भोजपुरी संगीत सम्मेलन में बिखेरा जादू

महेंद्र गुप्ता ब्यूरो लखीमपुर -खीरी

लखीमपुर। दशकों की धरोहर और पूर्वांचल की जीवंत संस्कृति के संगम स्थल पर प्राचीन ऐतिहासिक दशहरा मेला लखीमपुर अपने पूरे शबाब रहा। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शृंखला में ग्यारहवीं शाम सुरमई भोजपुरी संगीत सम्मेलन ने पांडाल में उपस्थित हर दर्शक को मंत्रमुग्ध कर दिया।

मुख्य अतिथि सीडीओ खीरी अभिषेक कुमार, पालिकाध्यक्षा डॉ. इरा श्रीवास्तव, ईओ संजय कुमार और अन्य विशिष्ट अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मंच पर भोजपुरी प्रस्तुतियों के संग सुर संगीत की मधुर लहरें बिखेरते हुए लोकगायिका संजोली पाण्डेय की प्रस्तुति ने लोगों के दिलों में सुर और थिरकन का अमर अनुभव उकेरा। उनकी मधुर और जीवंत प्रस्तुतियों ने पूर्वांचल की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को संजोते हुए दर्शकों को देर रात तक मंत्रमुग्ध रखा। उद्घाटन सत्र का संचालन समाजसेवी और साहित्यकार राम मोहन गुप्त ने किया। इस अवसर पर पारंपरिक रूप से पालिका परिषद द्वारा विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्रों में योगदान देने वाले लोगों का सम्मान किया गया। जिनमें एमआर सुजीत गुप्ता, सचिन प्रभाकर, अवधेश प्रताप सिंह, रामज्ञान, आदर्श मिश्रा, प्रमोद सिंह, प्रदीप सक्सेना, परशुराम सनातनी सेना के संतोष मिश्रा, पुत्तन मिश्रा, रवि श्रीवास्तव, सुनील शुक्ला, कीर्ति शुक्ला, छठ पूजा समिति आपन माटी के सूबेदार सिंह, चेतन सिंह, मनोज श्रीवास्तव वैभव, संजय राय, आशीष चौबे, अंशू गौड़, मनोज राय, अरुण पाण्डेय, राजेश सिंह को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता प्रीतम सिंह बग्गा, वरिष्ठ भाजपा नेता उमा शंकर मिश्रा दद्दू, समाजसेवी इंद्रेश गुप्ता, यदुलेश मुरारी सक्सेना, डॉ. पी के गुप्ता उपस्थित रहे। सम्मेलन का संयोजन सभासद विजय गुप्ता, अजय गुप्ता लकी, बृजेश पाल, अनिरुद्ध त्रिपाठी, राकेश कुमार के निर्देशन में हुआ। इस अवसर पर डॉ. प्रदीप गुप्ता, मेला अधिकारी समरा सईद, मेलाध्यक्ष कौशल तिवारी, श्वेता शर्मा, कुमुदेश्वर शंकर शुक्ला, इंजी. दुर्गेश वर्मा, दीपक रस्तोगी, बजरंग शर्मा, राकेश कश्यप आदि लोग सक्रिय रूप से उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि मेला आयोजन समिति की व्यवस्थाओं, स्वच्छता और सुचारू संचालन की मुख्य अतिथि ने प्रशंसा की। अतिथियों का स्वागत पालिकाध्यक्षा डॉ. इरा श्रीवास्तव ने किया और आभार व्यक्त किया अधिशासी अधिकारी संजय कुमार ने। इस दशहरा मेले ने न केवल पुरातन परंपराओं का जीवंत प्रदर्शन किया, बल्कि यह भी दर्शाया कि संस्कृति, संगीत और समाज सेवा के माध्यम से कैसे एक समुदाय अपनी आत्मा और पहचान को उजागर कर सकता है। लखीमपुर के यह सांस्कृतिक आयोजन दर्शकों के लिए प्रेरणा और आनंद का अमूल्य स्रोत बन गया है।

व्हाट्सप्प आइकान को दबा कर इस खबर को शेयर जरूर करें

विज्ञापन बॉक्स (विज्ञापन देने के लिए संपर्क करें)


स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे
Donate Now
               
हमारे  नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट , और सभी खबरें डाउनलोड करें
डाउनलोड करें

जवाब जरूर दे 

क्या शाहाबाद में महिला डिग्री कॉलेज की स्थापना की जरूरत है?

View Results

Loading ... Loading ...


Related Articles

Back to top button
Close
Website Design By Bootalpha.com +91 84482 65129