26 अगस्त को जन्माष्टमी मनाना श्रेष्ठकर

गोपाल चतुर्वेदी ब्यूरो चीफ मथुरा

 

ब्रज तीर्थ देवालय न्यास ने सभी देवस्थानों से एक दिन जन्माष्टमी मनाने का किया अनुरोध

 

मथुरा। ब्रज में सभी मंदिरों में 26 अगस्त को जन्माष्टमी महोत्सव मनाने के लिए ब्रज तीर्थ देवालय न्यास के पदाधिकारियों ने प्रयास प्रारंभ कर दिए हैं। पदाधिकारियों का कहना है कि ब्रज तीर्थ देवालय न्यास ने जन्माष्टमी 2 दिन न मनाकर, एक ही दिन मनाने पर सहमति व्यक्त की। अधिकतर देखा गया है कि कई त्योहार दो दिन मनाने का प्रचलन चल पड़ा है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का व्रत और प्रभु का अभिषेक कराना शास्त्र व विभिन्न पंचागों के आधार पर 26 अगस्त को ही मनाना शुभ फल दायक है। अत: ब्रज से यह संदेश जाना चाहिए सभी मंदिरों में एक ही दिन जन्माष्टमी मनाई जा रही है। ताकि कोई सनातन एकता पर हमला नहीं कर सके।

रविवार को भूतेश्वर स्थित श्रीजी बाबा आश्रम में पत्रकारों से वार्ता करते ब्रज तीर्थ देवालय न्यास के अध्यक्ष आचार्य रमाकांत गोस्वामी ने बताया कि चंडू पंचाग, निर्णय सिंधु, अथ दश वर्षीय मानव पंचाग सहित आधा दर्जन से अधिक पंचांगों में बाल कृष्ण का जन्म तिथि 26 अगस्त को ही मनाना चाहिए। इसके लिए ब्रज के सभी मंदिरों के प्रबंधक व सेवायतों को न्यास की ओर से पत्र लिखा जाएगा। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण जन्मस्थान को आधार मानकर पूरे ब्रज में जन्माष्टमी मनानी चाहिए इसी प्रकार बरसाने को आधार मानकर राधाष्टमी मनानी चाहिए।

संरक्षक आचार्य मृदुल कांत शास्त्री व अध्यक्ष ने प्रमाण प्रस्तुत करते हुए 26 अगस्त को ही जन्माष्टमी मनाना उचित बताया। साथ ही निर्णय लिया कि ब्रज के सभी देवालयों को पत्र भेजा जायेगा। केवल दो पंचांग विश्व व ऋषि को छोड़कर लगभग 20 पंचांगों में 26 अगस्त को ही ही मनाने का निर्देश है।, 26 अगस्त को अष्टमी सूर्योदय से पूर्व व, 27 को प्रात: 4:19 को समाप्त हो जायेगी। इस प्रकार 27 को उदयात् में अष्टमी नहीं है । उदया तिथि मानने वाले वैष्णवों के लिए 26 को ही योग बन रहा है। वशिष्ठ संहिता, विष्णु पुराण, धर्म पुराण के अनुसार भी, 26 को ही जन्माष्टमी का योग है। अग्नि पुराण , भागवत आदि पुराणों में भी अष्टमी से युक्त अर्ध रात्रि में ही कृष्ण जन्म हुआ है। आदि पुराण व भृगु पुराणके अनुसार को जयंती जन्माष्टमी योग ही यानि रोहिणी नक्षत्र युक्त अष्टमी होती ही। जो इस बार 26 को है।

वार्ता में उपाध्यक्ष विनय त्रिपाठी, महामंत्री आरके पांडेय, प्रवक्ता अमित भारद्वाज, कपिल चतुर्वेदी, विष्णु सिद्ध, विनय शास्त्री आदि उपस्थित थे। इससे पूर्व न्यास के पदाधिकारियों की बैठक हुई।

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