शिव महापुराण कथा में पूज्य संत अतुल कृष्ण भारद्वाज ने शिव विवाह की कथा सुनाते हुए कहा

अभिषेक चौहान ब्यूरो शाहजहांपुर 

 

शाहजहांपुर शिव महापुराण कथा में पूज्य संत अतुल कृष्ण भारद्वाज ने शिव विवाह की कथा सुनाते हुए कहा की शिवजी जब बारात लेकर चलने लगे तो उनकी बारात में भूत-प्रेत,बेताल सब मगन होकर नाच रहे थे। भगवान शिव स्वयं नंदी पर विराजमान थे और गले में नाग की माला धारण किए हुए थे। साथ में भगवान विष्णु और ब्रह्माजी भी देवताओं की टोली लेकर चल रहे थे। त्रिलोक शिव विवाह के आनंद से मगन हो रहा था। हर तरफ शिवजी के जयकारे लग रहे थे। बारात नगर भ्रमण करते हुए देवी पार्वती के पिता राजा हिमवान के द्वार पहुंची।बारात के स्वागत के लिए महिलाएं आरती की थाली लेकर आयीं। भगवान शिव की सासु मां मैना अपने दामाद की आरती उतारने दरवाजे पर पहुंची। भगवान शिव की सामने जब मैना पहुंची तो शिवजी का रूप देखकर चकरा गईं। उस पर शिवजी ने अपनी और लीला दिखानी शुरू कर दी। शिवजी के नाग ने फुफकार मारना शुरू किया तेज हवा से मैना के वस्त्र अस्त-व्यस्त होने लगे। मैना वहीं अचेत होकर गिर गईं। मैना को होश आया तो उन्होंने शिवजी के साथ अपनी सुकुमारी कन्या देवी पार्वती का विवाह करने से मना कर दिया। मैना ने कहा कि देवी पार्वती सुकुमारी को बाघंबरधारी, भस्मधारी मसानी को नहीं दे सकती। माता को व्याकुल देख पार्वती समझ गईं कि यह सब शिवलीला के कारण हो रहा है। देवी पार्वती ने कहा कि हे माता और पिताजी आप मुझे शिवजी से मिलने की आज्ञा दें फिर आपको शिव उसी रूप में मिलेंगे जैसा आप चाहते हैं।माता पिता से आज्ञा लेकर देवी पार्वती जनवासे में गईं जहां शिवजी विराजमान थे। देवी पार्वती भगवान शिव से बोली के हे प्रभु आप अपनी लीला समेटिए, मेरी माता आपका मसानी रूप देखकर व्याकुल हो रही हैं और आपसे मेरा विवाह नहीं करवाना चाहती हैं। हर माता की तरह उनकी भी इच्छा है कि उनका दामाद सुंदर और मनमोहक हो इसलिए आप अपने दिव्य रूप को प्रकट कीजिए। देवी पार्वती की मनोदशा समझकर शिवजी ने अपनी लीला समेट ली महाराज जी ने बताया भगवान विष्णु और चंद्रमा ने मिलकर भगवान शिव को दूल्हे के रूप में तैयार किया। भगवान शिव अपने चंद्रमौली रूप को धारण करके सबका मन मोह रहे थे।देवी मैना ने जब शिवजी का चंद्रमौली रूप देखा तो निहारती रह गईं। उन्हें अपने नेत्रों पर भरोसा ही नहीं हो रहा था। वह खुशी-खुशी शिवजी के विवाह की तैयारी करने लगीं। जब विवाह मंडप पर शिवजी पहुंचे और भोलेनाथ के जयकारों के साथ विवाह की रस्में शुरू हुई फिर ब्रह्माजी पुरोहित बने और देवी पार्वती की ओर से भगवान विष्णु उनके भाई बने और शिवजी का विवाह संपन्न नारद जी ने संपन्न कराया आज की आरती पूजन में मुख्य आयोजक हरि शरण बाजपेई सीमा बाजपेई अपर जिलाधिकारी डॉक्टर सुरेश कुमार एवं उनकी धर्मपत्नीआयोजन के अध्यक्ष दीपक शर्मा जेल अधीक्षक मिजाजी लाल जितेंद्र नाथ तिवारी श्री दत्त शुक्ला ब्लॉक प्रमुख कांट रवि मिश्रा एडवोकेट नीरज बाजपेई रजनीश कुमार अवस्थी रेनू अवस्थी मौजूद रहे

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