श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद में हिंदू पक्ष की बड़ी जीत, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने खारिज की मुस्लिम पक्ष की याचिका

गोपाल चतुर्वेदी ब्यूरो चीफ मथुरा

 

इलाहाबाद हाईकोर्ट से हिंदू पक्ष को बड़ी जीत मिली है। अदालत ने मुस्लिम पक्ष की याचिका को खारिज कर दी। मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर बने मंदिर को तीन बार तोड़ा गया और चार बार बनवाया जा चुका है। गुजरात के सोमनाथ मंदिर की तरह आक्रमणकारी महमूद गजनवी ने इसे भी लूटकर तुड़वा दिया था। दो पक्षों के बीच इस स्थान के मालिकाना हक को लेकर सालों पुराना विवाद अदालत में चल रहा है। इस बीच शाही ईदगाह मस्जिद और कृष्ण जन्मभूमि के विवाद को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है।

श्री कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद मामले में हिंदू पक्ष की बड़ी जीत हुई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट न्यायमूर्ति मयंक कुमार जैन की एकल पीठ ने शाही ईदगाह मस्जिद ट्रस्ट के आर्डर 7, R-11 का आवेदन खारिज किया। हिंदू पक्ष का सिविल सूट पोषणीय है। अदालत ने कहा है कि हिंदू पक्ष के सभी 18 वाद पोषणीय हैं, इस मामले में अगली सुनवाई 12 अगस्त को होगी।

कृष्ण जन्मभूमि मामले पर अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा है कि यह कानूनी प्रक्रिया है और कोर्ट ने यह कहा है। ऐसा 4 साल बाद हुआ है। जैन ने ये भी बताया कि 25 दिसंबर 2020 को मैंने इस मामले में मथुरा सिविल कोर्ट में पहला सिविल मुकदमा दायर किया था। आज इलाहाबाद कोर्ट ने इस मामले पर अपना आदेश सुना दिया है। शाही ईदगाह मस्जिद का दावा है कि कृष्ण जन्मभूमि के लिए हमने जो याचिका दायर की है, वह लागू नहीं होती… हमने अपनी बात रखी है कि पूजा स्थल अधिनियम यहां लागू नहीं होगा, क्योंकि यह एएसआई संरक्षित स्मारक है।”

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इससे पहले मथुरा विवाद को लेकर दाखिल 18 में से 15 याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अदालत ने अपने फैसले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज की।

हिंदू और मुस्लिम पक्ष की दीवानी मुकदमों की पोषणीयता को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आज अपना फैसला सुना दिया है। इसी साल 31 मई को जस्टिस मयंक कुमार जैन की सिंगल बेंच ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। हिंदू पक्ष की ओर से जो 18 याचिकाएं दाखिल की गई, उनमें ये मांग की गई है कि मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद को श्री कृष्ण जन्म स्थान बताकर उसे हिंदुओं को सौंप दिया जाए।

याचिका में ये भी मांग की गई है कि हिंदुओं को विवादित परिसर में पूजा अर्चना की अनुमति दी जाए, साथ ही विवादित परिसर का अयोध्या के राम मंदिर और वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर की तर्ज पर सर्वेक्षण कराया जाए। आपको बताते हैं कि अदालत का फैसला कितना अहम है।

मथुरा के मंदिर मस्जिद विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले की अहमियत इस बात से समझी जा सकती है कि हाईकोर्ट से आए के फैसले से ही यह तय हो गया कि हिंदू पक्ष की याचिकाएं सुनवाई के योग्य हैं या नहीं। मुस्लिम पक्ष की आपत्ति खारिज को अदालत ने खारिज कर दिया है, मतलब साफ है कि हिंदू पक्ष की याचिकाओं पर आगे की सुनवाई हो सकेगी। कयास लगाए जा रहे हैं कि हाईकोर्ट से झटका लगने के बाद अब मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगा।

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