रक्षाबंधन पर शाहाबाद में सामाजिक वानिकी की अनूठी पहल, पौधरोपण कर लिया हरियाली बचाने का संकल्प

शाहाबाद। रक्षाबंधन पर भाई-बहन की कलाई पर राखी सजी तो शाहाबाद में पेड़ों की जड़ों को भी ‘रक्षा’ का भरोसा मिला। सामाजिक वानिकी, वन एवं वन्यजीव प्रभाग हरदोई की ओर से आयोजित विशेष पौधरोपण कार्यक्रम में पौधे लगाए गए और उन्हें वृक्ष बनने तक सहेजने का संकल्प लिया गया। संदेश साफ था जिस तरह रिश्तों की रक्षा जरूरी है, उसी तरह जीवन देने वाली प्रकृति की रक्षा भी हमारी जिम्मेदारी है।
रक्षाबंधन के पावन पर्व को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए आयोजित इस पहल ने त्योहार के मायने ही कुछ और कर दिए। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि इंजीनियर वरुण कुमार पाठक, प्रधानाचार्य आईटीआई ने पौधरोपण किया। उनके साथ व्यापार मंडल कोषाध्यक्ष छुन्ना भैया, निष्काम मिश्रा, वन विभाग से अवनीश कुमार, सुमति मिश्रा, दीपशिखा मौर्या, वन प्रसारकर्ता शशिकांत बाजपेई, बीट प्रभारी रविन्द्र मिश्रा सहित आईटीआई स्टाफ और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
पौधा लगाया, अब पालने की बारी
कार्यक्रम में केवल पौधे लगाने की औपचारिकता नहीं हुई, बल्कि उनकी देखभाल और सुरक्षा का संकल्प भी लिया गया। मौजूद लोगों से कहा गया कि पौधरोपण तभी सार्थक है, जब लगाए गए पौधे सुरक्षित रहकर पेड़ बनें। नियमित सिंचाई, सुरक्षा और देखभाल के बिना पौधरोपण का उद्देश्य अधूरा रह जाता है।
मुख्य अतिथि वरुण कुमार पाठक ने कहा कि वृक्ष मानव जीवन का आधार हैं। वे केवल ऑक्सीजन ही नहीं देते, बल्कि पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आज बढ़ता प्रदूषण और घटती हरियाली चिंता का विषय है। ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम एक पौधा लगाने के साथ उसकी जिम्मेदारी भी उठानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि पौधरोपण को किसी एक दिन का कार्यक्रम न बनाकर जीवन का हिस्सा बनाना होगा। घर, विद्यालय, संस्थान या आसपास उपलब्ध खाली स्थान जहां जगह मिले, वहां पौधे लगाए जाएं और बच्चों व युवाओं को भी उनकी देखभाल के लिए प्रेरित किया जाए।
राखी के धागे ने दिया बड़ा संदेश
रक्षाबंधन पर आयोजित इस कार्यक्रम की सबसे खास बात यही रही कि यहां भाई-बहन के रिश्ते की सुरक्षा के संकल्प को प्रकृति की सुरक्षा से जोड़ा गया। जिस तरह राखी का धागा रिश्ते को जिम्मेदारी और विश्वास से जोड़ता है, उसी तरह एक पौधे को रोपना भी आने वाली पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी का धागा है।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने माना कि आज लगाया गया पौधा कल किसी के लिए छांव बनेगा, किसी को शुद्ध हवा देगा और किसी आने वाली पीढ़ी के जीवन को बेहतर बनाएगा। इसलिए पौधा लगाना सिर्फ हरियाली बढ़ाना नहीं, बल्कि भविष्य को सुरक्षित करने की कोशिश है।
आईटीआई स्टाफ की ओर से प्रधानाचार्य वरुण कुमार पाठक के साथ अनुदेशक मधु शुक्ला, साक्षी सिंह, सुनील कुमार, कृष्ण अवतार, क्लर्क श्याम सिंह और गार्ड आकाश सहित अन्य कर्मचारियों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।
एक पौधा आज, हजारों सांसों का सहारा कल
सामाजिक वानिकी की इस पहल ने रक्षाबंधन के पर्व को एक नए संदेश से जोड़ दिया। राखी की डोर जहां अपनों की सुरक्षा का वचन देती है, वहीं मिट्टी में रोपा गया पौधा आने वाली पीढ़ियों की सांसों की सुरक्षा का संकल्प बन सकता है।
क्योंकि पेड़ केवल जमीन पर खड़ा एक तना नहीं होता वह किसी की सांस, किसी की छांव और किसी के भविष्य की उम्मीद होता है।

इस रक्षाबंधन शाहाबाद में कलाई पर बंधी राखियों के साथ धरती की गोद में रोपे गए पौधों ने भी यही वादा किया रिश्ते भी बचेंगे और हरियाली भी… बस जरूरत है, आज लगाए गए पौधे को कल तक जिंदा रखने की।

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