बेसिक शिक्षा विभाग की नीतियां है सरकारी स्कूलों में कम नामांकन की जिम्मेदार : अक्षत पांडेय

तरंग गुप्ता संवाददाता शाहाबाद

 

कम छात्र संख्या के आधार पर स्कूलों के मर्जर के आदेश पर रोक लगाए सरकार

 

हरदोई- उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ की आवश्यक बैठक संघ भवन के सभागार में संगठन के प्रदेश कोषाध्यक्ष शिव शंकर पांडेय की अध्यक्षता में संपन्न हुई।

बैठक को संबोधित करते हुए प्रदेश कोषाध्यक्ष शिव शंकर पांडेय ने कहा कि 50 छात्र संख्या से कम वाले विद्यालयों का मर्जर असंवैधानिक व अनुचित है।

इस आदेश पर सरकार को रोक लगानी चाहिए।

कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों को दूसरे विद्यालयों में मर्ज करने के प्रदेश सरकार के नए फरमान से जिले भर के शिक्षक आंदोलित हो गए हैं। सरकार की इस नीति के विरोध में सैकड़ो शिक्षकों ने बैठक करके सरकार की व्यवस्था के खिलाफ आंदोलन का आगाज कर दिया।

उन्होंने बताया कि सर्व शिक्षा अभियान पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई के नेतृत्व वाली सरकार ने पारित किया था। सरकार की सोच थी कि 6-14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जाए । इस अभियान के अंतर्गत सरकार ने प्रत्येक गाँव व मजरे में प्राथमिक विद्यालय व प्रत्येक किमी पर विद्यालय की स्थापना हेतु भवन सहित तमाम संसाधन उपलब्ध कराए परंतु आज कम/अपर्याप्त छात्र संख्या के आधार पर विद्यालयों को समाप्त करके अन्य विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध कराने की कार्यवाही गतिमान है। परिवार कल्याण कार्यक्रम के अंतर्गत जनसंख्या वृद्धि की दर घट रही है दूसरी तरफ़ विभाग ने तमाम अधो मानक विद्यालयों को मान्यता प्रदान कर रखी है तथा तमाम ग़ैर मान्यता के विद्यालय अधिकारियों की मिलीभगत से वे आज भी संचालित हो रहे है।

ऐसे में नामांकन कम होना स्वाभाविक है ।

जिलाध्यक्ष अक्षत पांडेय ने पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों के मर्जर , पुरानी पेंशन बहाली, 2004 बैच के शिक्षकों के पुरानी पेंशन का मेमोरेंडम लागू करने , प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चो को सरकारी स्कूलों की तुलना में दिए जा रहे प्रोत्साहन, नामांकन में आधार की अनिवार्यता, शिक्षकों की पदोन्नति, स्थानांतरण एवं अन्य शिक्षक की समस्यायें लंबित हैं।

ऐसे में विद्यालयों मर्जर का आदेश नियमो के विपरीत है। इस आदेश पर सरकार को रोक लगानी चाहिए।

सरकार और शिक्षा विभाग के अधिकारी पेयरिंग व्यवस्था के नाम पर विद्यालयों का मर्जर किए जा रहे हैं।

इससे परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले छोटे-छोटे बच्चो का भविष्य चौपट हो जाएगा। विद्यालय की दूरी अधिक होने पर स्कूलों के बच्चे अन्य विद्यालयों तक नहीं पहुंच सकेंगे।

भारतीय संविधान में प्रदान किये गये शिक्षा के मौलिक अधिकार से वंचित रह जायेंगे।

सरकार ने विधान सभा में सदैव माना है कि छात्र व शिक्षक अनुपात उत्तर प्रदेश में मानक के अनुसार सही है तो फिर विद्यालयों को बंद करने की जरूरत क्या है और यदि सरकार को लगता है कि शिक्षकों की आवश्यकता है तो उसकी कमी नई भर्ती करके करनी चाहिए न कि विद्यालय बंद करके।

 

शिक्षकों की पदोन्नति रोकने की है बड़ी साजिश

 

जिलाध्यक्ष अक्षत पांडेय कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षकों की पदोन्नति रोकने के लिए उनके साथ बहुत बड़ी साजिश कर रही है। सरकार की इस नई नीति से

ग्रामीण क्षेत्र के तमाम बच्चे शिक्षा दूर हो जाएगे।

करीब 20 हज़ार विद्यालयों का मर्जर पूर्व में करके शिक्षकों की पदोन्नति के अवसर समाप्त कर दिए गए। परिणामस्वरूप वर्ष 2015 से आज तक किसी भी शिक्षक की पदोन्नति नहीं हुई ।

इस आदेश से शिक्षकों के हजारों पद समाप्त हो जायेंगे।

जिससे कार्यरत शिक्षकों की पदोन्नति नहीं होगी ।

आज आंदोलन में शिक्षकों ने शासन प्रशासन से मांग किया कि सर्व प्रथम शिक्षक समस्याओं का निराकरण करे।

जिलाध्यक्ष अक्षत पांडेय ने बताया कि आगामी 30 जून को जनपद के समस्त ब्लॉक मुख्यालयों पर ब्लॉक कार्यसमिति, संघर्ष समिति, सेवा निवृत शिक्षक प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों के साथ बैठक की जाएगी जिसमे मर्जर होने वाले विद्यालय के ग्राम प्रधान और विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष मौजूद रहेंगे।

बैठक में जिला मंत्री विपिन सिंह, कोषाध्यक्ष गजेंद्र प्रताप सिंह, उपाध्यक्ष ललित शुक्ला, नीता गुप्ता, नीरज अवस्थी, अनत राम पांडेय, राजकुमार मिश्रा, हिमांशु श्रीवास्तव, विवेक मिश्रा, रूपेश अवस्थी, चन्द्रभाल कुमार, सजीव पांडेय, राम शरण, अनुराग अवस्थी, देवेंद बाजपेयी, आशा वर्मा, संदीप त्रिवेदी, श्रीओम कटियार, अमित पांडे, आशीष मिश्रा, आशीष वर्मा, राधेश्याम सिंह, विवेक यादव, संतोष पटेल, प्रशुभ सिंह, क्षितिज़ मिश्रा, दिलीप गुप्ता,

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