अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह का त्याग एवं बलिदान बुलाया नहीं जा सकता

अभिषेक चौहान ब्यूरो शाहजहांपुर

 

आदर्श दिव्यांग कल्याण संस्थान ने अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह की जयंती पर किया नमन

 

शाहजहांपुर अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह की जयंती पर आज आदर्श दिव्यांग कल्याण संस्थान के प्रदेश सचिव नीरज वाजपेयी मंडल अध्यक्ष नलिनी ओमर संगीता अग्रवाल सरिता मिश्रा मंडल प्रभारी अशोक कुमार ने नगर निगम कार्यालय के समीप स्थापित अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं मोमबत्ती जलाकर उनको याद किया इस अवसर पर उनकी प्रपौत्र वधू श्रीमती रचना सिंह को शाल उड़ाकर सम्मानित किया इस मौके पर नीरज वाजपेई ने कहा कि ठाकुर साहब ने 6 दिसम्बर 1927 को इलाहाबाद स्थित मलाका (नैनी) जेल की काल-कोठरी से अपने एक मित्र को पत्र में लिखा था: “इस सप्ताह के भीतर ही फाँसी होगी। ईश्वर से प्रार्थना है कि वह आपको मोहब्बत (प्रेम) का बदला दे। आप मेरे लिये रंज (खेद) हरगिज (बिल्कुल) न करें। मेरी मौत खुशी का (कारण) होगी। दुनिया में पैदा होकर मरना जरूर है। दुनिया में बदफैली (पाप) करके अपने को बदनाम न करे और मरते वक्त ईश्वर की याद रहे;यही दो बातें होनी चाहिये और ईश्वर की कृपा से मेरे साथ ये दोनों बातें हैं। इसलिये मेरी मौत किसी प्रकार अफसोस के लायक नहीं है। दो साल से बाल-बच्चों से अलग रहा हूँ। इस बीच ईश्वर भजन का खूब मौका मिला। इससे मेरा मोह छूट गया और कोई वासना बाकी न रही। मेरा पूरा विश्वास है कि दुनिया की कष्ट भरी यात्रा समाप्त करके मैं अब आराम की जिन्दगी जीने के लिये जा रहा हूँ। हमारे शास्त्रों में लिखा है कि जो आदमी धर्म युद्ध में प्राण देता है उसकी वही गति होती है जो जंगल में रहकर तपस्या करने वाले ऋषि मुनियों की।”

पत्र समाप्त करने के पश्चात उसके अन्त में उन्होंने अपना यह शेर भी लिखा था:

 

जिन्दगी जिन्दा-दिली को जान ऐ रोशन!

वरना कितने ही यहाँ रोज फना होते हैं।

 

फाँसी से पहली रात ठाकुर साहब कुछ घण्टे सोये फिर देर रात से ही ईश्वर-भजन करते रहे। प्रात:काल शौचादि से निवृत्त हो यथानियम स्नान ध्यान किया कुछ देर गीता-पाठ में लगायी फिर पहरेदार से कहा-“चलो।” वह हैरत से देखने लगा यह कोई आदमी है या देवता! ठाकुर साहब ने अपनी काल-कोठरी को प्रणाम किया और गीता हाथ में लेकर निर्विकार भाव से फाँसी घर की ओर चल दिये। फाँसी के फन्दे को चूमा फिर ज़ोर से तीन बार वन्दे मातरम् का उद्घोष किया और वेद-मन्त्र – “ओ३म् विश्वानि देव सवितुर दुरितानि परासुव यद भद्रम तन्नासुव” – का जाप करते हुए फन्दे से झूल गये। ठाकुर साहब का यह बलिदान हम सबको जीवन पर्यंत याद रहेगा

व्हाट्सप्प आइकान को दबा कर इस खबर को शेयर जरूर करें

विज्ञापन बॉक्स (विज्ञापन देने के लिए संपर्क करें)


स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे
Donate Now
               
हमारे  नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट , और सभी खबरें डाउनलोड करें
डाउनलोड करें

जवाब जरूर दे 

क्या शाहाबाद में महिला डिग्री कॉलेज की स्थापना की जरूरत है?

View Results

Loading ... Loading ...


Related Articles

Back to top button
Close
Website Design By Bootalpha.com +91 84482 65129