अभिषेक चौहान ब्यूरो शाहजहांपुर

आज का यह दिवस हम सभी भारतीयों के लिए गौरव और गर्व का पावन प्रतीक है। आज हम स्वतंत्र भारत के 79वें स्वतंत्रता दिवस को उल्लास, श्रद्धा और आत्ममंथन के साथ मना रहे हैं। यह केवल एक तिथि नहीं, अपितु भारतवर्ष की आत्मा में अंकित एक अमर स्मृति है — वह दिन जब हमारे राष्ट्र ने पराधीनता की लंबी रात्रि के पश्चात स्वतंत्रता का स्वर्ण प्रभात देखा।

 

इस ऐतिहासिक अवसर पर हम उन असंख्य ज्ञात और अज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति अपनी अंत:करण से कृतज्ञता अर्पित करते हैं, जिन्होंने स्वतंत्रता रूपी अमूल्य रत्न के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। महात्मा गांधी के सत्य और अहिंसा पर आधारित तपश्चर्या, नेताजी सुभाषचंद्र बोस की तेजस्विता, सरदार पटेल की दृढ़ता, और भगतसिंह, आज़ाद, राजगुरु जैसे युवाओं की क्रांतिकारिता से ओतप्रोत बलिदान — यह सब हमारी स्मृति का अविभाज्य भाग है।

 

वर्तमान परिवेश में जब भारत विकास और आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है, तब परिवहन विभाग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। परिवहन केवल एक तंत्र नहीं, बल्कि राष्ट्र की गति, जीवंतता और प्रगति का दर्पण है। यह विभाग देश की सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक धाराओं को जोड़ने का अदृश्य सेतु है।

 

सुरक्षित, सुगम और पर्यावरणोन्मुखी यातायात व्यवस्था के निर्माण में हमारी सतत भागीदारी, एक ऐसे भारत की रचना में सहायक है जहाँ हर नागरिक निर्बाध, सम्मानपूर्वक और संरक्षित यात्रा कर सके। चाहे वह सड़क अवसंरचना का विकास हो, सड़क सुरक्षा अभियान, ग्रीन मोबिलिटी, डिजिटलीकरण या फिर सार्वजनिक परिवहन की दक्षता — परिवहन विभाग राष्ट्रीय विकास के मेरुदंड के रूप में उभर रहा है।

 

इस अवसर पर हम सबको यह आत्मचिंतन करना होगा कि क्या हम अपने कर्तव्यों का पूर्ण निष्ठा से पालन कर रहे हैं? क्या हम केवल दायित्व निभा रहे हैं या उसे सेवा का माध्यम बना रहे हैं?

 

हमें यह सुनिश्चित करना है कि:

हम यातायात नियमों के पालन को एक सामाजिक नैतिकता के रूप में प्रतिष्ठित करें,

दुर्घटनाओं की रोकथाम हेतु नवीनतम तकनीक और मानवीय दृष्टिकोण का समन्वय करें,

सार्वजनिक सुविधा, पारदर्शिता, और सुगमता को हर सेवा का आधार बनाएं,

तथा पर्यावरण-संवेदनशील और टिकाऊ परिवहन प्रणालियों के विकास में अग्रणी भूमिका निभाएं।

 

स्वतंत्रता दिवस केवल स्मरण का अवसर नहीं, संकल्प का क्षण है। आज हम सब यह संकल्प लें कि हम:”स्वतंत्र भारत के सेवक मात्र नहीं, बल्कि दृष्टा, निर्माता और संरक्षक भी बनें।”

 

हमारी कर्मनिष्ठा, हमारी सेवा भावना और हमारा राष्ट्रप्रेम — यही वह त्रिवेणी है जो विकसित भारत के स्वप्न को साकार कर सकती है।

आइए, हम सब मिलकर इस यज्ञ में अपनी आहुति दें — कर्तव्य की, समर्पण की, और सतत प्रगति की।

 

भारत माता की जय। वन्दे मातरम्। आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ। धन्यवाद।

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