अंतर्राष्ट्रीय स्व-देखभाल दिवस का आत्मसात नितांत आवश्यक : शिक्षाविद मनोज वशिष्ठ

राजेश भारद्वाज स्टेट हेड हरियाणा

रेवाड़ी। “स्वस्थ समाज की शुरुआत व्यक्ति की अपनी देखभाल से होती है” — इस मूल मंत्र के साथ अंतर्राष्ट्रीय स्व-देखभाल दिवस के अवसर पर शिक्षाविद मनोज वशिष्ठ ने लोगों से आह्वान किया कि वे स्व-देखभाल को अपनी जीवनशैली का अभिन्न अंग बनाएं। उन्होंने कहा कि यह दिवस न केवल स्वास्थ्य के महत्व को रेखांकित करता है, बल्कि मानसिक, शारीरिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक रूप से संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा भी देता है।

 

क्या है स्व-देखभाल दिवस का महत्व?

यह दिवस प्रतिवर्ष 24 जुलाई को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत ब्रिटेन में स्थित इंटरनेशनल सेल्फ-केयर फाउंडेशन द्वारा वर्ष 2011 में की गई थी। उद्देश्य था – हर व्यक्ति पहले स्वयं की देखभाल करे, ताकि समाज में सामूहिक रूप से स्वास्थ्य का स्तर बेहतर हो सके।

 

स्व-देखभाल के दो मुख्य भाग:

 

1. स्व-देखभाल कार्य – इसमें जीवनशैली से जुड़ी आदतें शामिल हैं जैसे संतुलित आहार लेना, नियमित व्यायाम करना, तनाव प्रबंधन, पर्याप्त नींद और मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखना।

 

 

2. स्व-देखभाल हस्तक्षेप – इसमें वे साधन आते हैं जो देखभाल में सहायक होते हैं, जैसे गुणवत्तायुक्त दवाइयाँ, जांच उपकरण, और डिजिटल हेल्थ टूल्स।

 

 

 

मनोज वशिष्ठ ने कहा कि आज के दौर में स्व-देखभाल की महत्ता और भी बढ़ गई है। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि वर्ष भर इस पर ध्यान देने के लिए एक व्यक्तिगत सेल्फ-केयर लिस्ट बनाएं, और खुद की भलाई के लिए समय निकालें।

 

कुछ व्यावहारिक उदाहरण:

 

रोज़ाना व्यायाम और मेडिटेशन करना

 

कृतज्ञता का अभ्यास करना और चिंतनशील डायरी रखना

 

स्वस्थ नींद और खानपान की आदतें

 

डिजिटल डिटॉक्स और सोशल मीडिया पर नियंत्रण

 

ज़रूरत पड़ने पर मदद मांगने में संकोच न करना

 

 

उन्होंने “The Comfort Book” (मैट हैग) और “The Self-Love Experiment” (शैनन कैसर) जैसी प्रेरणात्मक पुस्तकों का भी उल्लेख किया, जो आत्म-देखभाल की दिशा में मार्गदर्शक साबित हो सकती हैं।

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