एक दिन अंतिम, एक रात भारी… अब जनता के फैसले का इंतजार

राजेश भारद्वाज स्टेट हेड हरियाणा

 

राव बनाम कैप्टन की साख दांव पर, विकास और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर जनता करेगी फैसला

 

रेवाड़ी। नगर निकाय चुनाव का शोर आखिरकार थम गया। अब 10 मई को रेवाड़ी और धारूहेड़ा की जनता मतदान कर यह तय करेगी कि शहर को विकास की राह पर आगे बढ़ाना है या बदलाव के नाम पर सत्ता परिवर्तन करना है। चुनाव प्रचार के अंतिम दिन तक भाजपा और कांग्रेस दोनों ने पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन अब निगाहें जनता की खामोशी पर टिकी हैं, जो 13 मई को परिणाम के रूप में बड़ा संदेश दे सकती है।

यह चुनाव केवल नगर परिषद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अहीरवाल की राजनीति के दो बड़े चेहरों — केंद्रीय मंत्री Rao Inderjit Singh और पूर्व मंत्री Captain Ajay Singh Yadav की प्रतिष्ठा का सवाल बन गया। दोनों नेताओं ने अपने समर्थकों को मैदान में उतारकर चुनाव को सीधी राजनीतिक लड़ाई में बदल दिया।

भाजपा उम्मीदवार विनीता पीपल ने चुनाव में विकास कार्यों और नई टीम के साथ शहर को आगे बढ़ाने का मुद्दा उठाया, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार नेहारिका चौधरी ने पिछले पांच वर्षों में नगर परिषद में हुए कथित भ्रष्टाचार को मुख्य हथियार बनाया। अब जनता तय करेगी कि वह विकास के दावे पर भरोसा करती है या बदलाव के नारों पर।

चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा संगठन पूरी तरह सक्रिय दिखाई दिया। पार्टी के तमाम नेता एक मंच पर नजर आए। विशेष रूप से रेवाड़ी विधायक Laxman Singh Yadav भाजपा के लिए “तुरुप का इक्का” साबित होते दिखाई दिए। उन्होंने लगातार जनसभाएं कर माहौल बनाने का प्रयास किया और अपने डेढ़ वर्ष के कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखा। वहीं स्वास्थ्य मंत्री Aarti Singh Rao ने भी लगातार प्रचार कर भाजपा के पक्ष में मतदान की अपील की।

दूसरी ओर कांग्रेस का प्रचार काफी हद तक उम्मीदवार के परिवार और सीमित नेताओं तक सिमटा दिखाई दिया। हालांकि पूर्व विधायक Chiranjeev Rao ने चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन संगठनात्मक स्तर पर कांग्रेस उतनी सक्रिय नजर नहीं आई जितनी भाजपा।

चुनाव के अंतिम दिन आम आदमी पार्टी से विधानसभा चुनाव लड़ चुके सतीश यादव ने भी कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देकर मुकाबले को रोचक बनाने की कोशिश की। वहीं राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस चुनाव की सबसे बड़ी ताकत “जनता की चुप्पी” रही, जिसने प्रत्याशियों और नेताओं की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

अब देखना दिलचस्प होगा कि जनता विकास के दावों पर मुहर लगाती है या भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बदलाव का रास्ता चुनती है। इसका जवाब 13 मई को मतगणना के साथ सामने आएगा।

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